Friday, 26 October 2018

सामान्य विद्यालय

ब्रिटिश सरकार के भारत आगमन के बाद १८२३ के लगभग सामान्य विद्यालय का प्रचलन शुरू होता है. लेकिन 1826 में ब्रिटिश सरकार द्वारा सामान्य विद्यालय की स्थापना इस उद्देश्य से की जाती है कि ऐसे विधार्थियों को तैयार किया जा सके जो कि भविष्य में अध्यापक शिक्षण से जुड़ना चाहते है और इस क्षेत्र व्यवसाय के रूप में चुनना चाहते हैं . उसके तत्पश्चात 1847 में सामान्य विद्यालय के नाम पर ephisnton institute की स्थापना की जाती है जहाँ पर अध्यापक शिक्षकों को तैयार किया जाता था. 1882 में ब्रिटिश सरकार ने कहा की अध्यापक  शिक्षण को संस्था के अंतर्गत शुरू किया जाना चाहिए और इसके लिए समय-समय पर परीक्षाओं को करवाया जाना चाहिए क्योंकि जब तक अध्यापकों  को प्रशिक्षित नही किया जायेगा वे शिक्षण कार्य कुशलतापूर्वक नही कर सकते थे. अगर अध्यापक प्रशिक्षण प्राप्त किये हुए होंगे तब वे विद्यार्थियों को अच्छी तरह से शिक्षण प्रशिक्षण  के लिए तैयार कर सकेंगे.



ऐसे विद्यालय को सामान्य विद्यालय इसलिए कहा जाता क्योंकि ये विद्यालय एक प्रकार से आवासीय विद्यालय थे जहाँ शिक्षक और विद्यार्थी एक ही परिसर में रहते थे. इस परिसर में इनके बिच हर समय अंतर्क्रिया होती रहती थी जिसके परिणामस्वरूप शिक्षक प्रत्येक विद्यार्थियों से परिचित होता था. शिक्षकों को पता रहता  था की कौन-सा विद्यार्थी मेधावी है और कौन कमजोर है. मेधावी विद्यार्थी को पहचान करने के बाद शिक्षक इनको हो प्राथमिक स्तर के बालकों को पढ़ाने का दायित्व देते थे तथा ऐसे विद्यार्थियों को विशेष रूप से प्रशिक्षण दिया जाता था ताकि वे भविष्य में शिक्षण का कार्य कर सके. शिक्षक ऐसे विद्यार्थियों पर भी ध्यान देते थे जिनको शिक्षण व्यवसाय में रूचि हो और उनको भी शिक्षण व्यवसाय हेतु प्रशिक्षण के लिए तैयार करते थे. प्रशिक्षण संस्था में अध्यापक ऐसे विधार्थियों को तैयार करना चाहते थे जो आगे चलकर अपने भावी कार्य क्षेत्र में सक्षम  बन सके. आवासीय विद्यालय को ही सामान्य विद्यालय कहा जाता था. इस विद्यालय में बालकों को स्थानीय भाषा का ज्ञान होना आवश्यक था. इसके साथ-साथ प्रायोगिक कक्षा पर अधिक बल दिया जाता था. अध्यापक विद्यार्थियों के व्यावहारिक पक्ष पर अधिक बल देते थे. अध्यापक शिक्षण हेतु विद्यार्थियों  को जो अभ्यास या प्रशिक्षण दिया जाता था उससे उनको भविष्य  में सक्षम बनाने हेतु दिया जाता था जिससे वे अपने व्यावसायिक जीवन को बेहतर बना सके.

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